 | ॥ ज्ञानी और अज्ञानी के भेद ॥Differance Between Knower & Fool
कार्य हमेशा तीन प्रकार से मन, वाणी और शरीर के द्वारा ही किये जाते है, किसी भी कार्य को करते समय "कब हम अज्ञानी होते हैं और कब ज्ञानी होते हैं।" Work can be done with 3 ways! 1With Speech2with Body3With Mind
.त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः। कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किंचित्करोति सः॥ (गीता GITA) जो मनुष्य अपने सभी कर्म-फलों की आसक्ति का त्याग करके सदैव सन्तुष्ट तथा स्वतन्त्र रहकर सभी कार्यों में पूर्ण व्यस्त होते हुए भी वह मनुष्य निश्चित रूप से कुछ भी नहीं करता है। If you work without attachment of Result you can Enjoy Life! If you live without attachment & expectation you are free Soul Happy One!
कार्य हमेशा तीन प्रकार से मन, वाणी और शरीर के द्वारा ही किये जाते है, किसी भी कार्य को करते समय "कब हम अज्ञानी होते हैं और कब ज्ञानी होते हैं।" Work can be done by three ways By Mind , Body & Words! Word is World!
१. जब हम स्वयं के सुख की कामना करते हैं तब हम अज्ञानी होते हैं, और जब हम दूसरों के सुख की कामना करते हैं तब हम ज्ञानी होते हैं। 1.when we think of our Joy we are fool! When we think of Others we are Knowledgeable! २. जब हम दूसरों को जानने का प्रयत्न करते हैं तब हम अज्ञानी होते हैं, और जब हम स्वयं को जानने का प्रयत्न करते हैं तब हम ज्ञानी होते हैं। 2.When we Try to understand others we are FOOL!When we Understand Self We are Wise! ३. जब हम स्वयं को कर्ता मानकर कार्य करते हैं तब हम अज्ञानी होते हैं, और जब हम भगवान को कर्ता मानकर कार्य करते हैं तब हम ज्ञानी होते हैं। 3.When we do work as Doer we are Fool with Ego of I,Me & Mine! When do work thinking thy god is doing it,we are Wise!
४. जब हम दूसरो को समझाने का प्रयत्न करते हैं तब हम अज्ञानी होते हैं, और जब हम स्वयं को समझाने का प्रयत्न करते हैं तब हम ज्ञानी होते हैं। 4.When we try to explain others we are Fool! When we explain self we are Wise!
५. जब हम दूसरों के कार्यों को देखने का प्रयत्न करते हैं तब हम अज्ञानी होते हैं, और जब हम स्वयं के कार्यों को देखने का प्रयत्न करते हैं तब हम ज्ञानी होते हैं। 5.When we try to see how other work We are FOOL! When we see How we work We Are WISE!
६. जब हम दूसरों को समझाने के भाव से कुछ भी कहते या लिखते हैं तब हम अज्ञानी होते हैं, और जब हम स्वयं के समझने के भाव से कहते या लिखते हैं तब हम ज्ञानी होते हैं। 6.When we Say or Write to Explain other We are FOOL! When we Say or Write to Tell Ourself We Are WISE!
७. जब हम संसार की सभी वस्तुओं को अपनी समझकर स्वयं के लिये उपभोग करते हैं तब हम अज्ञानी होते हैं, और जब हम संसार की सभी वस्तुओं को भगवान की समझकर भगवान के लिये उपयोग करते हैं तब हम ज्ञानी होते हैं। 7. When we enjoy all luxury & material gains for ourself We Are FOOL! When we think all is god's grace & use utilise all for good & God work We are Wise! ----GURUJI ARUNESVAR
॥ हरि ॐ तत सत ॥Hari Om Thy & That is TRUTH! |
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